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मकर संक्रांति का महत्व: जानिए क्यों है यह त्योहार इतना खास तिल-गुड़ की मिठास और सूर्य उपासना का दिन

On: January 5, 2026 5:19 AM
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मकर संक्रांति का महत्व
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मकर संक्रांति का महत्व क्या है? जानिए इस पावन पर्व का धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व, दान-पुण्य, तिल-गुड़ और उत्तरायण की पूरी जानकारी।

मकर संक्रांति भारत के प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है, जिसे हर साल जनवरी महीने में पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं देता, बल्कि आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व

मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति का महत्व: जानिए क्यों है यह त्योहार इतना खास तिल-गुड़ की मिठास और सूर्य उपासना का दिन

मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी कारण इसे संक्रांति कहा जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे शुभ समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण का समय सकारात्मक ऊर्जा, प्रगति और नई शुरुआत का प्रतीक होता है।

आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और जप-तप का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। तिल, गुड़, कंबल, अन्न और वस्त्र का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

तिल-गुड़ की मिठास और सामाजिक संदेश

मकर संक्रांति का महत्व

इस पर्व पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन विशेष रूप से बनाए जाते हैं। तिल-गुड़ खाने की परंपरा हमें यह संदेश देती है कि जीवन में मिठास बनाए रखें और आपसी रिश्तों में प्रेम और सौहार्द बढ़ाएं। “तिल-गुड़ घ्या आणि गोड गोड बोला” जैसे संदेश इस त्योहार की आत्मा हैं।

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पतंगों के रंग और खुशियों की उड़ान

मकर संक्रांति पर आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। पतंग उड़ाना सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि उत्साह, उमंग और आज़ादी का प्रतीक है। यह त्योहार बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सभी के चेहरे पर मुस्कान लाता है।

देश के अलग-अलग रूप, एक ही भावना

भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति को विभिन्न नामों से मनाया जाता है—

  • पोंगल (तमिलनाडु)
  • लोहड़ी (पंजाब)
  • उत्तरायण (गुजरात)
  • खिचड़ी (उत्तर प्रदेश और बिहार)

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नाम भले ही अलग हों, लेकिन भावना एक ही है—नई फसल, नई शुरुआत और जीवन में खुशियों का स्वागत।

निष्कर्ष

मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने का संदेश है। यह हमें सिखाता है कि अंधकार से प्रकाश की ओर, निराशा से आशा की ओर और कटुता से मिठास की ओर बढ़ना ही सच्चा उत्सव है। यही कारण है कि मकर संक्रांति हर भारतीय के दिल के इतना करीब है।

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