सीतामढ़ी में मोदी बोले: बिहार के सीतामढ़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जनसभा संबोधन शुक्रवार को राजनीतिक तौर
पर काफी अहम साबित हुआ। चुनावी माहौल के बीच पीएम मोदी ने राज्य की जनता से आह्वान किया कि अब बिहार को
उस दौर से बाहर निकलना होगा, जब राजनीति का मतलब डर, कट्टा और अपराध होता था। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि
बिहार को अब विकास की राजनीति चाहिए, वह राजनीति जिसमें सड़क, बिजली, रोजगार और निवेश की चर्चा हो
, ना कि बम, बारूद और बंदूक की।

सीतामढ़ी में मोदी बोले: बिहार की राजनीति में बदलाव की पुकारपीएम मोदी के इस बयान ने सीधे-सीधे राज्य की पारंपरिक राजनीति पर प्रहार किया है। 1990 और 2000 के दशक में बिहार
अक्सर जातीय हिंसा, अपराध और पिछड़ेपन के लिए चर्चा में रहा। लेकिन पिछले दशक में राज्य ने काफी परिवर्तन देखा है।
केंद्र सरकार की योजनाओं — जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, हर घर जल मिशन, और
प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना — ने बिहार के गांवों और शहरों के बुनियादी ढांचे को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है।
मोदी का भाषण इस बदलाव को आगे बढ़ाने और उसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश थी।
सीतामढ़ी में मोदी बोले: कट्टा की राजनीति बनाम विकास का एजेंडा
जब मोदी बोले “कट्टा वाली नहीं, विकास वाली सरकार चाहिए,” तो यह केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था,
बल्कि जनता की भावनाओं को छूने वाला वक्तव्य था। बिहार की जनता लंबे समय तक अपराध और अस्थिरता से
जूझती रही है। आज जब नौजवान बेहतर शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा चाहते हैं, तो ऐसे में मोदी का
यह वक्तव्य एक भावनात्मक आह्वान के रूप में सामने आया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि बिहार के युवाओं को बंदूक नहीं, कंप्यूटर चाहिए; उन्हें अंधेरे से बाहर निकलकर नई
तकनीकी, स्टार्टअप्स और उद्योगों की तरफ बढ़ना चाहिए। उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जिनके
शासन में कट्टा संस्कृति फली-फूली, वही आज विकास की बात करने निकल पड़े हैं। जनता को पहचानना होगा
कि कौन बिहार को आगे बढ़ाना चाहता है और कौन उसे अतीत में धकेलना चाहता है।
स्थानीय मुद्दों पर फोकस
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मोदी ने अपने भाषण में सीतामढ़ी और मिथिलांचल की संस्कृति, परंपरा और देवी सीता की नगरी होने का उल्लेख करते हुए
कहा कि यह भूमि श्रम और संस्कार दोनों की प्रतीक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास
के लिए अभूतपूर्व निवेश किया है, जिसमें नई सड़कों, रेलवे परियोजनाओं, और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार शामिल है।
इसके साथ ही उन्होंने महिला सशक्तिकरण की योजनाओं — जैसे उज्ज्वला गैस कनेक्शन, जनधन खाते और
मातृत्व योजनाओं — का उल्लेख किया और कहा कि इन पहलों से लाखों महिलाओं के जीवन में सामाजिक और
आर्थिक बदलाव आया है।
विपक्ष पर तीखा हमला
पीएम मोदी ने विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल आज फिर से बिहार को “अपराध और करप्शन”
के उसी रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब भी बिहार ने अपराध की राजनीति को वोट दिया,
राज्य पीछे गया। लेकिन जब जनता ने विकास और स्थिर शासन को चुना, तब उद्योग आए, निवेश बढ़ाऔर
लोगों के जीवन में सुधार हुआ।मोदी ने यह भी कहा कि केंद्र की सरकार बिहार के हर जिले को आत्मनिर्भर बनाने के
लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में राज्य के कृषि उत्पादों के लिए
आधुनिक बाजार, फूड प्रोसेसिंग
यूनिट्स और स्मार्ट इंडस्ट्रियल ज़ोन बनाने की योजना है।
संदेश और प्रभाव
सीतामढ़ी की रैली ने बिहार की चुनावी राजनीति में नई दिशा की चर्चा शुरू कर दी है।
मोदी का फोकस स्पष्ट था-भावनाओं से ऊपर उठकर विकास के एजेंडे पर वोट मांगा जाए।
यह भाषण न केवल भाजपा के समर्थकों के लिए,
बल्कि हर उस मतदाता के लिए संदेश था जो बिहार को प्रगति की राह पर देखना चाहता है।











